Sambhal Lok Sabha Election Result 2019: डॉ० शफ़ीक़ुर्रहमान बर्क ने लहराया जीत का परचम

Sambhal Election Result 2019: 17वीं लोकसभा चुनाव के तहत उत्तर प्रदेश की  संभल सीट पर सभी की निगाहें हैं.

Sambhal Election Result 2019: संभल संसदीय सीट पर मतगणना की प्रकिया चल रही है. इस सीट पर बीजेपी और सपा में सीधा मुकाबला है. इस सीट पर  मतगणना  के  दौरान  मिलने  वाले  रुझान  और अंतिम  परिणाम  जानने  के  लिए  इस  पेज  पर  बने  रहें  और  इसे  रिफ्रेश  करते  रहें.

प्रत्याशी का नामप्राप्त मत परिणाम
डॉ० शफ़ीक़ुर्रहमान बर्क़ (सपा-बसपा-रालोद) 658006 विजेता
परमेश्वर लाल सैनी (बीजेपी) 483180 उपविजेता

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कब  और  कितनी  हुई  वोटिंग

संभल सीट  पर  वोटिंग तीसरे चरण  में 23  अप्रैल  को  हुई  थी,  इस सीट पर 64.57 फीसदी लोगों ने अपने मताधिकार  का  इस्तेमाल  किया  था. इस सीट पर कुल 1827861 मतदाता हैं, जिसमें से 1182137 मतदाताओं ने अपने वोट डाले हैं.

कौनकौन  हैं  प्रमुख  उम्मीदवार

इस सीट  पर  भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी परमेश्वर लाल सैनी है, जिनका मुख्य मुकाबला समाजवादी पार्टी के डॉक्टर शफीकुर रहमान बर्क और कांग्रेस के मेजर जगत पाल सिंह से है.प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के करण सिंह यादव सहित 12 उम्मीदवार मैदान में हैं. प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के करण सिंह यादव सहित 12 उम्मीदवार मैदान में हैं.


2014 का चुनाव

2014 के लोकसभा चुनाव में संभल सीट पर 62.43 फीसदी वोटिंग हुई थी, जिसमें बीजेपी प्रत्याशी सत्यपाल सैनी को 34.08 फीसदी (3,60,242) वोट मिले थे और और उनके निकटतम सपा प्रत्याशी शफीकुर रहमान बर्क को 33.59 फीसदी (3,55,068)  मिले थे. इसके अलावा बसपा के अकीलुर्रहमान को महज 23.90 फीसदी (2,52,640) वोट मिले थे. इस सीट पर बीजेपी के सत्यपाल सैनी ने महज 5,174 मतों से जीत दर्ज की थी.

संभल सीट का इतिहास

संभल लोकसभा सीट 1977 में अस्तित्व में आई, इमरजेंसी के बाद देश में पहली बार चुनाव हुए और तब यहां से चौधरी चरण सिंह की पार्टी ने जीत दर्ज की. उसके बाद 1980 और 1984 में लगातार कांग्रेस फिर 1989 और 1991 में जनता दल ने ये सीट जीती. 1996 में बाहुबली डीपी यादव ने बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर इस सीट पर कब्जा किया.


1998 में ये सीट वीआईपी सीटों की गिनती में आ गई जब तत्कालीन समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव ने लोकसभा चुनाव में जीत हासिल की. इसके बाद 1999 में भी वह यहां से चुनाव जीते. 2004 में उनके भाई प्रोफेसर रामगोपाल यादव यहां से सांसद चुने गए, लेकिन 2009 में बहुजन समाज पार्टी ने यहां से जीत हासिल की थी और बीजेपी कमल खिलाने में कामयाब रही थी.

Source: AajTak

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