प्रियंका होंगी मोदी के खिलाफ उम्मीदवार तो क्या होगा वाराणसी का हाल! पढ़ें यह स्पेशल रिपोर्ट

अगर प्रियंका गाँधी वाराणसी से उम्मीदवार हुई तो मोदी के लिए राह आसान नहीं होगी.

विश्वस्त सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक़ कांग्रेस महासचिव और पूर्वी उत्तर प्रदेश प्रभारी प्रियंका गांधी को कांग्रेस वाराणसी लोकसभा सीट से उम्मदीवार बना सकती है. पार्टी में इस पर मंथन जारी है. वाराणसी में पीएम मोदी कल पहुंच रहे है और एक रोड शो में शामिल होंगें. मोदी वाराणसी से नामांकन भी दाखिल करेंगे.

पीएम मोदी के खिलाफ वाराणसी में प्रियंका गांधी वाड्रा कांग्रेस की उम्मीदवार हो सकती हैं. शीर्ष सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस के भीतर इस पर चर्चा चल रही है. जल्द ही पार्टी इस पर निर्णय लेगी. उधर इस बाबत जब प्रियंका से पूंछा गया तो उन्होंने कहा कि पार्टी अगर यह निर्णय लेती है तो में चुनाव लड़ने के लिए तैयार हूँ.

पीएम मोदी ने पिछले लोकसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी के सयोंजक अरविन्द केजरीवाल को हराया था. 2014 के चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कुल 5,81,022 वोट मिले थे उन्होंने निकटतम प्रतिद्वंदी अरविंद केजरीवाल को तकरीबन 03 लाख 77हज़ार वोटों से हराया था.

आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल को 2,09,238 वोट मिले थे, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी के अजय राय को 75,614 वोट, बीएसपी को तकरीबन 60 हज़ार 579 वोट, सपा को 45291 वोट मिले थे. यानि सपा-बसपा और कांग्रेस का वोट जोड़ दे तो 03 लाख 90 हज़ार 722 वोट हो जाते हैं. मतलब पीएम मोदी की जीत का जो अंतर था वह सभी दलों के संयुक्त वोट बैंक से पीछे हो जाता है.

सवाल इस बात का है कि जिस तरह से सपा-बसपा ने रायबरेली और अमेठी में अपने प्रत्याशी न उतारने का फैसला किया है अगर प्रियंका वाराणसी से चुनाव लड़ती हैं तो क्या उनके लिए भी रास्ता खाली कर दिया जाएगा जिसकी सुनगुनी सुनाई देने लगी है.

बात जातिगत समीकरण की करें तो वाराणसी में सबसे ज्यादा बनिया मतदाता करीब 3.25 लाख हैं जो बीजेपी के कोर वोटर हैं. अगर नोटबंदी और जीएसटी के बाद उपजे गुस्से को कांग्रेस भुनाने में कामयाब होती है तो यह वोट कांग्रेस की ओर खिसक सकता है. वहीं ब्राह्मण मतदाता, जिनकी संख्या ढाई लाख के करीब है, माना जाता है कि विश्वनाथ कॉरीडोर बनाने में जिनके घर सबसे ज्यादा टूटे हैं या यूं कहें कि जो सबसे ज्यादा बेघर हुए हैं उनमें ब्राह्मण ही हैं. फिर एससी/एसटी संशोधन बिल को लेकर भी नाराजगी है. यादवों की संख्या डेढ़ लाख है।

इस सीट पर पिछले कई चुनाव से यादव समाज बीजेपी को ही वोट करता आ रहा है. लेकिन सपा के समर्थन के बाद इस पर भी सेंध लग सकती है. वाराणसी में मुस्लिमों की संख्या तीन लाख के आसपास है. यह वर्ग उसी को वोट करता है जो बीजेपी को हरा पाने की कूबत रखता हो. यानी कुल मिला कर यह कहा जा सकता है कि प्रियंका के बनारस से आने के बाद बनारस संसदीय सीट पर लड़ाई कांटे की होगी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लि 2014 जैसा माहौल बना पाना उतना आसान भी नहीं होगा.

Facebook Comments