उत्तर प्रदेश शासन पर लंबित भर्तियों को आगे बढाने का दबाव बढा

उत्तर प्रदेश के परिषदीय स्कूलों में शिक्षकों के सैकड़ों पद रिक्त होने बाबजूद प्रदेश सरकार शिक्षक भर्ती में टालमटोल कर समय व्यतीत कर रही है. पूर्ववर्ती सपा सरकार द्वारा शुरू की गयीं भर्तियों पर वर्तमान भाजपा सरकार ने अस्तित्व में आने के बाद रोक लगा दी थी. बाद में भर्तियों को बिना किसी कारण के निरस्त कर दिया गया. यहीं से उत्तर प्रदेश सरकार और भावी शिक्षकों के मध्य न्यायिक लड़ाई प्रारम्भ हुई.

इस न्यायिक लड़ाई को करीब 2 साल हो चुके हैं. इस लड़ाई में पहला और सबसे बड़ा नुकसान उन नैनिहालों का हुआ जो शिक्षकों के आभाव में दस्तावेजों पर पास कर दिए गए लेकिन वास्तव में वे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से वंचित रह गए.

दूसरा नुकसान उन शिक्षकों का हुआ जिनको 2 वर्ष में वेतन के रूप में मिलने वाले लाखों रुपयों के रोज़गार की जगह न्यायालय के चक्कर काटने पड़े.

तीसरा नुकसान आम जनता का हुआ जिसके टैक्स के पैसों से सरकार ने न्यायालय में इन भर्तियों को निरस्त करने के अपने फैसले को सही साबित करने की पुरजोर कोशिश की लेकिन सभी प्रयास विफल रहे.

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