यूपी में अफसरशाही के बाद अब सियासत की पारी खेलेंगे यह पूर्व IAS-IPS अधिकारी

लखनऊ. यूपी की राजनीति में केवल नेता ही नहीं बल्कि अफसर भी अपने रिटायरमेंट के बाद सियासत की पारी खेलते रहे हैं. वर्ष 2019 के लोकसभा चुनावों में भी यूपी के कई रिटायर्ड अफसर नौकरी की पारी खेलने के बाद अब सियासी पारी खेलने की तैयारी कर रहे हैं.

यूं तो सियासत और अफसरशाही का पुराना नाता है. नौकरी में रहने के दौरान नेताओं की आंख, कान और नाक अफसर ही होते हैं. 2019 के लोकसभा चुनावों में यूपी के कई रिटायर्ड अफसर अब सियासी पारी खेलने की तैयारी कर रहे हैं. इस बार चुनावों में ऐसे कई अफसर अलग-अलग लोकसभा सीट से अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं. कुछ आईएएस तो वहां से चुनाव मैदान में उतर रहे हैं, जहां वे खुद डीएम रह चुके हैं.

आईपीएस कुश सौरभ, पीसीएस अफसर श्याम सिंह यादव, पीडब्लूडी के प्रमुख अभियंता पद से 2011 में वीआरएस लेने वाले त्रिभुवन राम, रिटायर्ड आईएएस विजय शंकर पांडे, रिटायर्ड आईएएस राम बहादुर, पूर्व आईआरएस प्रीता हरित जैसे अफसर इस बार चुनावी पारी खेल रहे हैं.

वरिष्ठ पत्रकार रतन मणि लाल का कहना है कि अफसरों का सियासी पारी खेलने का सिलसिला काई नया नहीं है. तीन दशक पहले ये ट्रेंड देखने को मिला था. 80 के दशक में ये यूपी में देखने को मिला, और ये राजनीतिक जागरूकता का ही संकेत है. अफसर इसमें आगे बढ़ जाते हैं क्योंकि वह अपनी नौकरी के दौरान सरकार के बीच में ही रहते हैं.

यूपी में चुनाव पारी खेलने वाले अफसर हैं आईपीएस कुश सौरभ, पीसीएस अफसर श्याम सिंह यादव, रिटायर्ड आईएएस विजय शंकर पांडे, रिटायर्ड आईएएस राम बहादुर, पूर्व आईआरएस प्रीता हरित,  पीडब्लूडी के प्रमुख अभियंता रहे त्रिभुवन राम.

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