मायावती को बड़ा झटका देने की तैयारी में सपा मुखिया अखिलेश यादव, यह है आगे की रणनीति

लोकसभा में अपेक्षा के मुताबिक गठबंधन को सीट न मिलने के सपा और बसपा के गठबंधन में खटास आने के बाद बसपा सुप्रीमों मायावती ने गठबंधन से किनारा कर लिया था. सपा के अपेक्षा के मुताबिक खराब प्रर्दशन के कारण पार्टी में भूचाल मचा हुआ है.

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सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक प्रदेश में पार्टी के शीर्ष नेतृत्व में बदलाव किया जा सकता है. प्रदेश अध्यक्ष के पद पर किसी अनुसूचित जाति के नेता को बैठाया जा सकता है, जिससेअनुसूचित जाति के लोग पार्टी से जुड़े. अखिलेश यादव के विदेश यात्रा से लौटने के बाद पार्टी में कई परिवर्तनों को अमलीजामा पहनाया जा सकता है.

अनुसूचित जाति के नेता को बनाया जा सकता है प्रदेश अध्यक्ष

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बसपा से गठबंधन टूटने के बाद एक बार फिर से मुलायम सिंह यादव के जमाने के फार्मूले को दोहराय़ा जा सकता है. सपा के नए प्रदेश अध्यक्ष के साथ-साथ ही फ्रंटल संगठनों में भी नए अध्यक्षों की घोषणा हो सकती है.

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पार्टी की शीर्ष ईकाई को भंग करने की तैयारी

अटकलों की माने तो नरेश उत्तम के स्थान पर किसी अन्य अनुसूचित जाती से ताल्लुक रखने वाले नेता को बागडो़र दी जा सकती है. वहीं नरेश उत्तम को संगठन में कोई और दायित्व दिया जा सकता है. पार्टी नेतृत्व की माने तो लोकसभा चुनाव में हार की वजह पार्टी का संगठनात्मक ढांचा भी रहा.

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