धार्मिक हिंसा, अपराध की रोकथाम हेतु कानून के प्रति जनमानस में कैसे बढे जागरूकता ?

जैसा कि आपको पता है हमारे देश मे लोग सबसे ज़्यादा नफरत एक दूसरे के धर्म से करते है। फिर चाहे वो पुराने इतिहास को लेकर हो या फिर मौजूदा सामाजिक-राजनितिक हालात की वजह से हो। यही बात है कि आजकल छोटी लड़ाई भी एक साम्प्रदायिक रूप लेकर दंगे में तब्दील हो जाती है जिसमे सैकड़ो मासूम लोग मारे जाते है न जाने कितने घर तबाह हो जाते है लेकिन इसे रोका कैसे जाए ये कभी हम सोचते ही नही या शायद इन्हे रोकना हम चाहते ही नहीं ?

हमें समाज में हिंसा, शोषण और अपराध के प्रति सतर्क और चौकन्ने नागरिक बनना होगा।

Nargis Bano, Social Activist

मेरे विचार में इसके लिए पहले हमे अपने आपको बदलना होगा। हमारी कोशिश ये होनी चाहिए कि हम एक दूसरे के प्रति कभी नफरत नही रखे और कभी किसी के धर्म के खिलाफ गलत टिप्पणी ना करे। हमे शांति से हर मसले पर बात करना होगा और अपने स्वभाव को नरम रखना होगा । इतिहास में क्या हुआ , क्या ऊंच नीच हुई ये भूलकर हमे आगे कैसे साथ रहना है इस पर ध्यान देना होगा । जैसा कि हम देखते है कि आजकल अपराध बढ़ते जा रहे है और समाज और राजनीती मे अपराधियो का कैसे बोलबाला है इसके लिए हमे जागरूक होना होगा और समाज के लोगो को भी जागरूक करना होगा ।

अगर कोई अपराध करे तो उसके खिलाफ ये नही की पीड़ित वर्ग ही FIR करे , आप भी शिकायत करने की पहल कर सकते है और ऐसी समस्या से समाज को छुटकारा दिला सकते है। हमें समाज में हिंसा, शोषण और अपराध के प्रति सतर्क और चौकन्ने नागरिक बनना होगा। इससे अपराधी कभी खुलेआम अपराध करने की नही सोचेंगे , लोगों के जागरूक होने से समाज जागरूक होगा और इसका दायरा बढेगा और आपके बदलने से देश भी बदलेगा ।

(लेखिका नरगिस बानो सोशल एक्टिविस्ट हैं। वह सामाजिक, राजनितिक, लैंगिक न्याय तथा महिला अधिकारों जैसे विषयों पर बेबाकी से लिखती हैं)

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