कर्नाटक के बागी विधायकों को झटका, CJI बोले- स्पीकर को क्या करना है ये हम नहीं बताएंगे

नई दिल्ली : बागी विधायकों की तरफ से मुकुल रोहतगी ने कहा कि विधायक कोई ब्यूरोक्रेट या कोई नौकरशाह नहीं हैं, जो कि इस्तीफा देने के लिए उन्होंने कोई कारण बताना पड़े. इसपर चीफ जस्टिस ने कहा कि अगर हम आपकी बात मानें, तो क्या हम स्पीकर को कोई ऑर्डर दे सकते हैं? आप ही बताएं कि ऐसे में क्या ऑर्डर हम दे सकते हैं? मुकुल रोहतगी ने इस दौरान मध्य प्रदेश, कर्नाटक और गोवा के उदाहरण भी पेश किए.  

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केरल की अदालत ने तुरंत इस्तीफा स्वीकार करने को कहा

बागी विधायकों की तरफ से मुकुल रोहतगी ने इस दौरान केरल, गोवा, तमिलनाडु हाईकोर्ट के कुछ फैसलों के बारे में बताया. जिसमें स्पीकर को पहले इस्तीफे पर विचार करने को कहा गया है और अयोग्य के लिए फैसले को बाद में. उन्होंने कहा कि केरल की अदालत ने तो तुरंत इस्तीफा स्वीकार करने की बात कही थी.  

चीफ जस्टिस ने इस दौरान कहा कि हम ये तय नहीं करेंगे कि विधानसभा स्पीकर को क्या करना चाहिए, यानी उन्हें इस्तीफा स्वीकार करना चाहिए या नहीं. हालांकि, हम सिर्फ ये देख सकते हैं कि क्या संवैधानिक रूप से स्पीकर पहले किस मुद्दे पर निर्णय कर सकता है. CJI ने कहा कि कोर्ट ये तय नहीं करेगा कि स्पीकर को क्या करना है. मुकुल रोहतगी ने इस दौरान कहा कि इस्तीफे के पीछे कई (Myriad) कारण हो सकते हैं. इस दौरान CJI ने कहा कि क्या…मिलियन? बाद में मुकुल रोहतगी ने खुद को सुधारा.  


गिर सकती है कर्नाटक सरकार

सुनवाई के दौरान मुकुल रोहतगी ने कहा कि जिन विधायकों ने याचिका डाली है अगर उनकी मांग पूरी होती है तो कर्नाटक की सरकार गिर जाएगी. स्पीकर जबरन इस्तीफा नहीं रोक सकते हैं. इसी दौरान चीफ जस्टिस ने मुकुल रोहतगी से अयोग्य करार दिए जाने के नियमों के बारे में पूछा. बागी विधायकों की तरफ से मुकुल रोहतगी ने कहा कि अगर व्यक्ति विधायक नहीं रहना चाहता है, तो कोई उन्हें फोर्स नहीं कर सकता है. विधायकों ने इस्तीफा देने का फैसला किया और वापस जनता के बीच जाने की ठानी है. अयोग्य करार दिया जाना इस इच्छा के खिलाफ होगा.

सुप्रीम कोर्ट में कर्नाटक मामले की सुनवाई शुरू

कर्नाटक मसले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू हो गई है. सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने मुकुल रोहतगी से विधायकों के इस्तीफे की तारीख पूछी. इसके अलावा उन्हें अयोग्य करार दिए जाने की तारीख भी पूछी. जिसके जवाब में मुकुल रोहतगी ने कहा कि 10 जुलाई को 10 विधायकों ने इस्तीफा दिया, वहीं सिर्फ दो विधायकों का अयोग्य करार दिया जाना 11 फरवरी से पेंडिंग है. इसके अलावा CJI ने बाकी पांच विधायकों के बारे में पूछा, जिसके जवाब में मुकुल रोहतगी ने बताया कि वे सभी भी इस्तीफा दे चुके हैं.

कर्नाटक में मचे राजनीतिक घमासान की तस्वीर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से साफ होगी तो वहीं 18 जुलाई को विधानसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग होनी है. मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी का दावा है कि उनके पास बहुमत है. 224 नंबर वाली विधानसभा में अभी कांग्रेस-JDS के पास 100 (विधायकों का इस्तीफा स्वीकार होता है तो), भाजपा के पास 105+ विधायक हैं.


मुंबई के रिजॉर्ट में बढ़ाई गई सुरक्षा

एक तरफ जहां सुप्रीम कोर्ट इस मसले में फैसला सुना रहा है, तो वहीं मुंबई के रिजॉर्ट में रुके हुए बागी विधायकों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है. होटल में रुके सभी विधायक अब ऊपरी फ्लोर में चले गए हैं. साथ ही साथ आसपास सुरक्षा के कई घेरे तैयार किए गए हैं.

इस्तीफा देने वाले कांग्रेस और जेडीएस के 16 विधायकों ने स्पीकर द्वारा इस्तीफा स्वीकार ना करने पर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था. इसमें से 10 विधायकों ने पहले और बाकी विधायकों ने बाद में अलग से याचिका दायर की थी. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की बेंच अब मंगलवार को इस पर फैसला सुनाएगी. इससे पहले अदालत ने स्पीकर को मंगलवार तक कोई भी फैसला लेने से इनकार किया था.

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कर्नाटक में क्या होगा ?

कर्नाटक में पिछले 11 दिन से जो राजनीतिक घटनाक्रम चल रहा है, आज सुप्रीम कोर्ट उसपर फैसला सुना सकता है. कांग्रेस-जेडीएस के बागी विधायकों की याचिका पर अदालत कर्नाटक के स्पीकर को कोई आदेश दे सकता है. इस फैसले से साफ होगा कि स्पीकर इन विधायकों का इस्तीफा स्वीकार करेंगे या नहीं. 18 जुलाई को कर्नाटक की विधानसभा में होने वाली अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग से पहले अदालत का ये फैसला सबसे बड़ा टर्निंग प्वाइंट हो सकता है.

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