RTI संशोधन विधेयक राज्यसभा से पास, जावेद अली खान ने बताया लोकतंत्र की पारदर्शिता को खतरा

नई दिल्ली : 16वीं लोकसभा के कार्यकाल में सरकारी विधेयकों के पारित होने में बड़ी बाधा रही राज्यसभा में सरकार ने गुरुवार को विपक्षी एकजुटता का तानाबाना तोड़ दिया। एक दिन पहले ही कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी दलों ने सूचना के अधिकार (आरटीआइ) संशोधन और तत्काल तीन तलाक सहित सात विधेयकों का रास्ता रोकने की रणनीति तैयार की थी।

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बीजू जनता दल (बीजद) और तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) ने सरकार का साथ देकर आरटीआइ संशोधन विधेयक पारित करा दिया। अब ये अटकलें भी तेज हो गई हैं कि तत्काल तीन तलाक सहित कुछ दूसरे विधेयकों पर भी राज्यसभा में विपक्ष का अब तक का बहुमत अल्पमत में बदल सकता है।

दो दिन पहले लोकसभा में दोनों दलों ने आरटीआइ संशोधन विधेयक का विरोध किया था। आज राज्यसभा में विधेयक के समर्थन में 117 मत पड़े जबकि विरोध में सिर्फ 75 मत पड़े।

महाकवि बिहारी के दोहे से जावेद अली खान ने साधा सरकार पर निशाना

सतसैया के दोहरे, ज्यों ‘नावक’ के तीर,
देखन में छोटे लगै, घाव करे गंभीर

महाकवि बिहारी

बता दें की राज्यसभा में समाजवादी पार्टी का प्रतिनिधित्व करते हुए सांसद जावेद अली खान ने आरटीआई संशोधन विधेयक,2019 का पुरज़ोर विरोध किया।
राज्यसभा में विधेयक पर चर्चा के दौरान उत्तरप्रदेश से राज्यसभा सांसद जावेद अली खान ने सरकार की तीखी आलोचना की साथ ही सरकार के आरटीआई अधिनियम में संशोधन करने के निर्णय को लोकतंत्र की आत्मा पर घाव बताया।

विधेयक में केंद्रीय मुख्य सूचना आयुक्त, राज्य मुख्य सूचना आयुक्त एवं अन्य सूचना आयुक्तों की सेवा शर्तों और वेतन-भत्तों में संशोधन सम्बंधित प्रावधानों पर जावेद अली खान ने कहा की इस संशोधन को लाकर सरकार ऐसे सूचना आयुक्त बनाना चाहती है जो जिसकी खाएंगे उसी की बजायेंगे।

सरकार ने कहा कि इस संशोधन के जरिये सिर्फ सेवा शर्तो और वेतन-भत्तों में बदलाव किया जा रहा है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि मुख्य सूचना आयुक्त का दर्जा सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश या मुख्य चुनाव आयुक्त जैसा नहीं है। मौजूदा कानून के तहत मुख्य सूचना आयुक्त का दर्जा सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के बराबर रखा गया था।


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केंद्रीय कार्मिक राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने विधेयक पेश करते हुए कहा कि इस संशोधन से आरटीआइ की स्वायत्ता और अधिकारों में किसी भी तरह की कोई आंच नहीं आएगी।

हालांकि कांग्रेस सहित दूसरे विपक्षी दलों ने इस बीच हंगामे का कोई मौका नहीं छोड़ा। मतदान के बाद हार देखकर वे सदन से वॉकआउट कर गए। इससे पहले सरकार ने आरटीआइ संशोधन विधेयक पर विपक्ष की सारी आशंकाओं का एक-एक करके जवाब दिया।

राज्यसभा में कांग्रेस के नेता गुलाम नबी आजाद ने सरकार पर लोकतंत्र की हत्या का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार संसद को भी सरकारी विभाग की तरह चलाना चाहती है। उन्होंने कहा कि ऐसी सरकार पर उन्हें कोई भरोसा नहीं है।


दरअसल, कांग्रेस के लिए इस विधेयक का पारित होना एक बड़ा झटका है। अब तत्काल तीन तलाक विधेयक राज्यसभा में आना है। राजग का घटक दल जदयू इसके विरोध में है, लेकिन बीजद समर्थन में।

देखना होगा कि सरकार उस विधेयक पर विपक्ष की रणनीति को कैसे तोड़ेगी। ध्यान रहे कि राज्यसभा में फिलहाल राजग और विपक्ष के संख्या बल में बहुत कम अंतर रह गया है और थोड़े बदलाव से ही पूरा परिदृश्य बदल जाएगा।

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