तो क्या झूठ बोलने के लिए स्मृति ईरानी पर होगा एक्शन? कभी बीए, कभी बीकॉम, लास्ट में 12वीं पास

Election 2019: स्मृति ईरानी के हलफमानों से उनकी शैक्षणिक योग्यता पर फिर से सवाल उठे हैं। 2004 के हलफनामे में जो उन्होंने जानकारी दी थी, वह 2014 और 2019 से बिल्कुल भी मेल नहीं खाता। यह साफ हो गया है कि ईरानी ग्रैजुएट नहीं बल्कि 12वीं पास हैं।

केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी की शैक्षणिक योग्यता का तिलिस्म अब लगभग उजागर होता नज़र आ रहा है। 2004 से लेकर 2019 तक के चुनावी हलफमानों में शैक्षणिक योग्यता में अंतर पाए जाने के बाद उन पर झूठ बोलने के आरोप लग रहे हैं। ऐसे में सवाल यह भी उठाए जा रहे हैं कि क्या ईरानी के खिलाफ कोई एक्शन भी लिया जाएगा?

शुक्रवार को (12 अप्रैल) को कांग्रेस की प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी ने आरोप लगाए कि स्मृति ईरानी ने अपनी वास्तविक शैक्षणिक जानकारियों को छिपाया और झूठ बोला। कांग्रेस प्रवक्ता ने मांग की कि ईरानी को मंत्री पद से हटाया जाए और उनके चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगाया जाए।

दरअसल, गुरुवार को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के खिलाफ अमेठी लोकसभा सीट से अपने नामांकन के दौरान स्मृति ईरानी ने पहली बार अपने हलफनामे में माना कि वह ग्रैजुएट नही हैं। 2004 के बाद उनके द्वारा दी गई जानकारियों कोई बड़ा अंतर नहीं देखने को मिला है। इस बार हलफनामें में ईरानी ने बताया कि उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग से 1994 में बैचल ऑफ कॉमर्स पार्ट-1 की स्टूडेंट रही हैं और तीन साल के डिग्री कोर्स को पूरा नहीं किया। मगर, 2004 से लेकर 2019 तक उनके बीए, बीकॉम और 12वीं पास का मसला जरूर अटका रहा है।

बैकग्राउंड

इससे पहले 2004 में चांदनी चौक लोकसभा क्षेत्र से नामांकन भरने के दौरान दौरान उन्होंने बताया था कि 1996 में दिल्ली यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ करेस्पॉन्डेंस से बैचलर ऑफ आर्ट किया है।

जबकि, 2014 लोकसभा चुनाव में स्मृति ने बताया था कि उन्होंने 1994 में दिल्ली यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग से बैचलर ऑफ कामर्स पार्ट-1 किया है।

अब यहां कन्फ्यूजन की स्थिति हो गई थी कि ईरानी बैचलर ऑफ आर्ट्स की स्टूडेंट थी या बैचल ऑफ कॉमर्स की। जब ईरानी 2011 में राज्यसभा सदस्य के तौर पर संसद पहुंच रहीं थीं, तब उन्होंने अपनी प्रोफाइल में बताया था कि उन्होंने दिल्ली के होली चाइल्ड एक्ज़िलियम स्कूल से शिक्षा हासिल की है और डीयू से करेस्पॉन्डेंस की शिक्षा ले रही है।

हालांकि, स्कूलिंग को लेकर उनकी तारीख और साल एक समान ही है। वर्तमान चुनावी हलफनामे में ईरानी ने जानकारी दी है कि उन्होंने 1991 में हाईस्कूल और 1993 में इंटरमीडिएट की परीक्षा पास की है। स्मृति ईरानी के 2004 के अलावा बाकी हलफनामों में लगभग एक ही जानकारी दी गई है। चुनावों में शैक्षणिक योग्यता को लेकर गलत जानकारी देने के मामले में पहली बार कांग्रेस ने उन्हें कटघरे में खड़ा किया था। उस दौरान 2014 में मोदी सरकार ने उन्हें शिक्षा मंत्रालय जैसा बड़ा और अहम पोर्टफोलियो सौंपा था। इस दौरान कांग्रेस नेता अजय माकन ने ट्वीट करके कहा था कि स्मृति ईरानी ग्रैजुएट तक नहीं हैं। ईरानी का इस मसले पर कभी भी संतोषजनक जवाब नहीं रहा है।

बीते सालों में स्मृति ईरानी के द्वारा अपने हलफनामें शिक्षा को लेकर गुमराह करने का मामला कई बार तूल पकड़ चुका है। 2016 में उनके खिलाफ दिल्ली की एक अदालत में मामला भी दर्ज कराया गया। इस दौरान जज ने शिकायतकर्ता की याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि अगर स्मृति ईरानी मंत्री नहीं होतीं, तो यह उन्हें तंग नहीं किया जाता। इस दौरान तमाम एक्टिविस्ट ने सूचना के अधिकार के तहत दिल्ली विश्व विद्यालय से उनकी शैक्षणिक जानकारियां हासिल करने की कोशिश कीं। लेकिन, मुख्य सूचना आयुक्त को दिल्ली के स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग ने जानकारी दी कि ईरानी (तत्कालीन मानव संधान एवं विकास मंत्री) ने उन्हें जानकारी साझा करने से मना किया है। ईरानी के येल यूनिवर्सिटी से भी डिग्री हासिल करने का मामला मीडिया में उछला, लेकिन इस चुनावी हलफनामें में कहीं भी उनके द्वारा येल यूनिवर्सिटी का जिक्र नहीं है।

via jansatta

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