जानें क्यों है मायावती को दलितों से ज्यादा ब्राह्मणों पर भरोसा ?

बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवरों की जो लिस्ट सामने आ रही है उसमें एक बात तो साफ है कि माया को सबसे ज्यादा भरोसा ब्राम्हणों पर है. भले ही जातिवार टिकटों का आकड़ा देखें तो ऐसा लगेगा कि मायावती ने सबसे ज्यादा टिकट दलितों को दिया है, लेकिन बंटवारे का असली गणित समझेगें तो ये साफ हो जाएगा कि बीएसपी कि लिस्ट में ब्राह्मण सबसे ज्यादा फायदे में रहे हैं.

आज (14 अप्रैल) की लिस्ट में 11 उम्मीदवारों में 4 ब्राह्मण हैं. अब तो बीएसपी का जो पैट्रन रहा है, उसमें एक बात साफ है कि लोकसभा प्रभारी ही प्रत्याशी हो रहा है. इस हिसाब से देखें तो 9 ब्राह्मणों को टिकट मिलने की उम्मीद है जबकि 10 दलित हाथी पर सवार होकर मैदान में जाएंगे.

गौर से देखें तो दलितों को मिलने वाली 10 सीटें सुरक्षित हैं यानी यहां तो बीएसपी या कोई भी राजनीतिक दल दलित उम्मीदवार ही उतार सकता है. बीएसपी और पार्टी सुप्रीमों मायावती को सबसे ज्यादा भरोस ब्राह्मणों पर ही क्यों है, इसके पीछे कई कारण हैं.

ब्राह्मणों ने ही दिलाई थी 2007 में सीएम की कुर्सी

उत्तर प्रदेश की राजीनिती में ब्राह्मणों की संख्या भले ही 9 से 10 फीसदी है लेकिन इन्हें किसी भी और जाति से ज्यादा प्रभावित करने वाला माना जाता है और मायावती इसके असर 2007 के विधानसभा चुनावों में देख भी चुकी हैं.
पार्टी ने पहली बार ब्राह्मण दलित गठजोड़ का प्रयोग कर 89 सीटें ब्राम्हणों की दी, जिसका सीधा असर दिखा. 74 उम्मीदवार जीते. बीएसपी पहली बार 207 सीटें जीतकर पूर्ण बहुमत के साथ सरकार में आई. पार्टी का वोट प्रतिशत भी 2002 के विधानसभा चुनावों के मुकाबले करीब 23 फीसदी से बढ़कर 30 फीसदी के आंकड़े को पार कर गया.

ब्राह्मण माया के सबसे पुराने और भरोसेमंद साथी

मायावती के राजनीति में प्रवेश करने से अब तक के चेहरों पर नजर डालें तो दो ही चेहरे हैं जो पार्टी में बचे हैं. पहले सुखदेव राजभर और दूसरे रामवीर उपाध्याय. मायवती की पहली कैबिनेट के बाकी चेहरे उनका साथ छोड़ चुके हैं.

मायावती के करीब जो दूसरा ब्राह्मण चेहरा है, वो है सतीश चन्द्र मिश्र का, जिस पर मायावती इस समय सबसे ज्यादा भरोसा करती हैं. सतीश चन्द्र मिश्रा को मायावती का संकट मोचक माना जाता है. मिश्रा मायावती के साथ तब आए जब वो तमाम कानूनी मुश्किलों में फंसी हुईं थीं.
मिश्रा ने बीएसपी सुप्रीमों को हर कानूनी मुश्किल से तो बचाया ही, ब्राह्मण दलित गठजोड़ बनवाकर पहली बार पूर्ण बहुमत की सरकार भी बनवाई. साफ है, मायावती का यही भरोसा इस लोकसभा चुनाव में ब्राह्मणों को ज्यादा से ज्यादा टिकट दिलाने में कामयाब रहा है.

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