2014 के मुकाबले रामदेव का भाजपा प्रेम ठंडा, बोले- तस्वीर अच्छी है, सरकार के बारे में कह नहीं सकते

हरिद्वार | पहले चरण में वोटिंग के दौरान हरिद्वार में योग गुरू बाबा रामदेव ने अपना वोट डालने के बाद मीडिया से बातचीत में कहा कि अगली सरकार को लेकर तस्वीर अच्छी है और परिणाम भी अच्छे होंगे. हालाकि सरकार किसकी बनेगी इसको लेकर उन्होंने साफ तौर पर किसी पार्टी का नाम नहीं लिया. बता दें कि साल 2014 में बाबा रामदेव ने खुलकर भाजपा का समर्थन किया था और PM नरेंद्र मोदी के लिए रैलियां भी की थी.

भाजपा का विरोध तो नहीं बल्कि समर्थन ही किया

लेकिन अब रामदेव जरा बदले बदले से दिखे. उन्होंने मोदी या भाजपा का विरोध तो नहीं किया, बल्कि समर्थन ही किया. लेकिन समर्थन में वो जोश नहीं दिखा, जो 2014 में था. बाबा रामदेव ने कहा मैं देश की जनता से कहना चाहता हूं, आओ करें मतदान की चोट और मिटाए लोकतंत्र की खोट’. इसके आगे उन्होंने कहा,” पूरे देश में राजनीतिक अफरातफरी का दौर है. आज राजनीतिक असुरक्षा, समाजिक, आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा का प्रश्न है. जो इससे देश को बाहर निकाल सके ऐसा नेतृत्व भारत को चाहिए.”

अपनी बातचीत में राहुल गांधी या कांग्रेस पर सीधे हमले नहीं किए, लेकिन इतना जरूर कहा कि देश चलाना कोई बच्चों का खेल नहीं है. उन्होंने कहा, “बड़ी-बड़ी बातें करने से देश नहीं चलता है. खाली झूठे वादे करने से देश नहीं चलता है. देश इरादों से चलता है.”राम देव ने आगे कहा, ”जो आज कह रहा है मेरी सरकार बनाओ उनसे पूछना चाहिए कि तुमने किया क्या है देश के लिए ये बताओ. हमे ट्रैक रिकॉर्ड देखना चाहिए, कंट्रीब्यूशन देखना चाहिए, कैरेक्टर देखना चाहिए, पॉलिसी देखनी चाहिए, उनकी लीडरशिप क्वालिटी को देखनी चाहिए. यह देखना चाहिए कि जिनको हम वोट दे रहे हैं क्या वह इस महान राष्ट्र का नेतृत्व करने में सक्षम हैं.”

महंगाई, बेरोजगारी देश के मुद्दे हैं

जब मीडिया ने बाबा राम देव से पूछा कि इस बार जनता किस मुद्दे पर वोट कर रही है, नाम पर, वादे पर या किसी के चेहरे पर तो इसके जवाब में उन्होंने कहा, ”थोड़ा-थोड़ा वोट सभी को पड़ेगा लेकिन इस समय जो वोट पड़ेगा वह राष्ट्रीय सुरक्षा पर पड़ेगा. विकास पर वोट पड़ेगा, महंगाई, बेरोजगारी भी इस देश के मुद्दे हैं, उसपर भी वोट पड़ेगा. अंतत: लोग सोचते है कि मेरे पास जो पांच विकल्प हैं उनमें से सबसे बेहतर कौन है.”

इस बार 2014 की तरह वह चुनाव में सक्रिय क्यों नहीं थे इसके जवाब में उन्होंने कहा, ”पहले मैं आंदोलन के मोड पर था. हर समय आंदोलन के मोड पर नहीं रहा जाता. महात्मा गांधी भी जब आंदोलन करते थे तो 10 साल तक फिर क्रिएटिव काम किया करते थे. मैं भी पिछले पांच साल से क्रिएटिव काम कर रहा था. हर क्षेत्र में चाहे वो शिक्षा हो, एग्रीकल्चर हो या उद्योग हो. मैं राजनीति के साथ राष्ट्रनीति की भी बात करता हूं.”

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