देश के 26 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेश के जीएसटी में 25 फीसदी की आई गिरावट

भारत में भयंकर महामारी कोरोनावायरस के आने के बाद देश की अर्थव्यवस्था उथल-पुथल हो गई है। जहां एक तरफ हर वस्तु की कीमत बढ़ गई है वहीं वस्तु एवं सेवा कर नीचे आ गया है। देश के 26 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेश में एक साल पहले की तुलना में जीएसटी में  करीब 25 फीसदी की गिरावट आई है। 

वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने लोकसभा में कहा है कि  कोरोना काल के कारण वित्त वर्ष 2019-20 की तुलना में इस वित्त वर्ष 2020-2021के पहले पांच महीनों में इन राज्यों का जीएसटी राजस्व में करीब एक-चौथाई की गिरावट आई है।


अनुराग ठाकुर ने कहा है कि मिजोरम और गोवा जैसे राज्यों को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। एक साल पहले के मुकाबले में उनके इस बार के राजस्व में 43 फीसदी की गिरावट आई है। बाकी राज्यों की बात की जाए तो झारखंड को पिछले साल 10,091 करोड़ रुपये के मुकाबले इस साल 5,967 करोड़ रुपये और उत्तराखंड को पिछले साल 6,327 करोड़ रुपये के मुकाबले सिर्फ इस बार  3,760 करोड़ रुपये मिले हैं। तो वहीं सिक्किम के राजस्व में क्रमश: 6.7 फीसदी और त्रिपुरा के राजस्व में क्रमश: 2.1 फीसदी की गिरावट आई है, जबकि नगालैंड के राजस्व में करीब 12 फीसदी की गिरावट आई है।

इसी तरह, 11 राज्यों और केंद्र​शासित प्रदेशों में राजस्व की कमी अप्रैल से अगस्त 2020 तक बढ़कर 30 से 38 फीसदी तक पहुंच चुकी है। इस हिसाब से देश के 26 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के जीएसटी राजस्व में इस वित्त वर्ष के पहले पांच महीनों में करीब 29 फीसदी की कमी देखने को मिली हैं।


हालही में हुए जीएसटी काउंसिल की 41वीं बैठक में राज्यों को दो विकल्प दिये गये हैं ताकि वे अपने जीएसटी मुआवजे की भरपाई कर सकें। एक विकल्प हैं 97,000 करोड़ रुपये का उधार लेने का या फिर पूरा नुकसान 2.35 लाख करोड़ रुपये का उधार लेने का। मतलब राज्यों को कम से कम ब्याज दर पर उधार लेकर अपना काम चलाने को कहा गया है।

बता दें 13 राज्यों ने इस प्रस्ताव को स्वीकार भी कर लिया है। इसके अलावा गोवा, असम, अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड, मिजोरम और हिमाचल प्रदेश भी एक या दो दिन के भीतर अपनी राय भी बता देंगे।  जीएसटी एक्ट के मुताबिक राज्यों को हुए नुकसान की भरपाई काउंसिल की सिफारिश पर की जाती है। बता दें यह भरपाई जीएसटी लागू होने के पांच वर्षों तक यानी 2022 तक होती रहेगी।

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